मेरी नाराज़गी का कोई वजूद नहीं है किसी के लिए,
मुझ जैसे लोग अक्सर यूँ ही भुला दिए जाते हैं कभी-कभी...
बहुत थे मेरे भी इस दुनिया में अपने ,
फिर हुआ सच बोलने का नशा .......
और हम लावारिस हो गए...
मेरी नाराज़गी का कोई वजूद नहीं है किसी के लिए,
मुझ जैसे लोग अक्सर यूँ ही भुला दिए जाते हैं कभी-कभी...
बहुत थे मेरे भी इस दुनिया में अपने ,
फिर हुआ सच बोलने का नशा .......
और हम लावारिस हो गए...
0 टिप्पणियाँ